दस्तक

जिसे दुनिया देख नहीं सकती, लेकिन जिसकी सहायता से दुनिया देखती है, वह प्रकाश है।

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प्रकाश झा


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नारी

Posted On: 1 Feb, 2013  
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मच्छर

Posted On: 30 Jan, 2013  
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हम और हमारी हिन्दी

Posted On: 27 Aug, 2012  
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गुरू या गुरूघंटाल ?

Posted On: 20 Aug, 2012  
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सरोकार से बनती-बिगड़ती भाषा

Posted On: 11 Aug, 2012  
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न मिला मां का आंचल ना ही आशियाना

Posted On: 1 Aug, 2012  
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उड़ान

Posted On: 24 Jul, 2012  
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अधुरी नारी

Posted On: 24 Jul, 2012  
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क्या हम स्वतंत्र हैं ?

Posted On: 23 Jul, 2012  
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संसद

Posted On: 23 Jul, 2012  
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बिहार बदल गया

Posted On: 23 Jul, 2012  
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आमदनी अठन्नी खर्चा रुपइया…

Posted On: 21 Jul, 2012  
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चिलचिलाती गर्मी में ठंढक का एहसास

Posted On: 21 Jul, 2012  
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फैशन के बारे में कठपुतली की सोच

Posted On: 17 Jul, 2012  
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सच्चाई छुप नहीं सकती !

Posted On: 17 Jul, 2012  
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बारिश

Posted On: 17 Jul, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्रकाश जी , सादर नमस्कार. हिंदी की वर्तमान परिस्थिति पर इतना विस्तृत विश्लेषण करने के लिए आप को बधाई. प्रकाश जी, हिंदी जब तक वर्तमान पीढ़ी के हाथों में है तब तक सुरक्षित है. facebook aur twitter पर twit करके बड़े होने वाली वर्तमान पीढ़ी हिंदी का क्या करने वाली है आगे आने ही वाला है. हिंदी का भविष्य पूरी तरह अभिभावकों और अध्यापकों पर ही निर्भर है के वो बच्चों के सामने कैसा आदर्श प्रस्तुत कर रहें हैं. अंग्रेजी में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के मन में यदि ये बात बैठा दी जाए के पढ़े अंग्रेजी में , कोई बात नहीं लेकिन रोजमर्रा के काम हिंदी में ही करेंगे ; तो हिंदी कहीं जाने वाली नहीं है. लेकिन ऐसा तभी होगा जब माता पिता हिंदी में काम करें और हिंदी पढ़ें. मेरे घर और मित्रों के बच्चे अंग्रेजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं. मैं अक्सर उन्हें कहता हूँ के घर में हिंदी पत्र और पत्रिकाओं को मंगाएं . बच्चों को अच्छी हिंदी पुस्तकें उपहार में दें. तो बच्चों में हिंदी प्रेम जरुर जागृत होगा. हम अंग्रेजी शिक्षा को ना तो बंद कर सकतें हैं ना ही कम कर सकते हैं. सरकार से कोई अपेक्षा करना बेकार है. हमें ही अपनी हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए स्वयं ही कुछ करना होगा. इसका एक ही मंत्र है के- हिंदी पढ़ें , हिंदी लिखें , और हिंदी में काम करके गर्व महसूस करें. तभी बचेगी हिंदी, बढ़ेगी हिंदी. प्रकाश जी, आप को शुभकामनाएं . नमस्ते जी.

के द्वारा: Ravinder kumar Ravinder kumar

सरकार चाहे जितनी भी कोशिश कर ले इन्हें बदला नहीं जा सकता। भले ही इन्हें तीन रुपए किलो अनाज मिल रहा है, कभी विकास नहीं कर सकते। करें भी तो कैसे? इनका मानना है जब खाने के लिए दाना मिल ही रहा है तो काम करने की जरुरत ही क्या है, कैसे भी बीपीएल सूची में नाम जुड़ जाए। घर बनाने के लिए 40,000 नकद और तीन रुपए किलो अनाज मिलेगी, ऊपर से तीन लीटर सस्ते दाम पर किरोसीन की सरकारी व्यवस्था है। कुल मिलाकर अपनी तो वारे-न्यारे हैं। घर बने या न बने इसकी किसे फिकर है। इंदरा आवास में पैसा ही कितना मिलता है। सरकार से कह देंगे घर बाढ़ में बह गया। इसमे कही से भी सच्चाई नहीं झलक रही आज रोजगार के लिए बड़े सहरो में बिहारी पलायन कर रहे है यह आप भी जानते है बिहारी कितने स्वाभिमानी और मेहनती है यह जगजाहिर है आप के आलेख से में सहमत नहीं हु .लोकप्रियता पाने के लिए सस्ते लेख ना लिखे पहले जमीनी सच्चाई को जाने वैसे मुझे लगता है की आप भी एक बिहारी ही है लेकिन कही बड़े सहर में निवास कर रहे है तभी यह भावना जागृत हुई है .

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

मैं भी कृष्ण को महान मानता हूँ किन्तु उनके कुछ कृत्य मानवीय दृष्टि से क्षम्य नही ं हैं। हो सकता है कि मेरे विचारों से कोई सहमत न हो किन्तु मैं तार्किक कारणों से अपने विचारों पर अटल हूँ। दिनेश “आस्तिक” जी ..... आपने अपनी प्रतिकिर्या में जिन तार्किक कारण का उल्लेख किया है मैं तुच्छ प्राणी उनकी विस्तारपूर्वक व्याख्या जानना चाहता हूँ ताकि मेरा ज्ञानवर्धन हो सके और मैं अज्ञानी आपसे कुछ ज्ञान पा सकू ..... किरपा करके मेरा मार्गदर्शन कीजिये ..... उम्मीद है की आप मुझको निराश नहीं करेंगे ..... :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D (पहले जो रहते थे साथ मिलकर सब करते थे काज अब हुआ उनमें विखण्डन हजार।-प्रकाश जी - अभी भी पूरी तरह से अँधेरा नहीं हुआ है , कहीं कहीं प्रकाश की किरने फूटती ही रहती है आपसी सद्भाव की -)

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat




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